!!!!*संकट मोचन हनुमान जी महाराज बाबा नीम करोली जी महाराज की जय हो*!!!! 🚩 आज का हिंदू वैदिक पंचांग 🚩 ((ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र- 9415087711)) 🌤️ दिनांक - 31 अक्टूबर 2026 🌤️ दिन - शनिवार 🌤️ *विक्रम संवत 2083 🌤️ शक संवत -1948 🌤️ अयन - दक्षिणायन 🌤️ ऋतु - हेमंत ॠतु 🌤️ *मास - कार्तिक 🌤️ पक्ष - कृष्ण 🌤️ तिथि - षष्ठी रात्रि 9:25 तक तत्पश्चात सप्तमी 🌤️ नक्षत्र - आर्द्रा दोपहर 12:15 तक तत्पश्चात पुनर्वसु 🌤️ योग - सिद्ध रात्रि 11:04 तक तत्पश्चात साध्य 🌤️*राहुकाल - सुबह 9:00 से सुबह 10:30 तक* 🌤️ *सूर्योदय - सुबह 6:27 पर 🌤️ *सूर्यास्त - संध्या समय 5:33 पर 👉 दिशाशूल - पूर्व दिशा मे 🚩*व्रत पर्व विवरण - *विशेष- *षष्ठी 🚩 👉🏻 केवल एक लोटा जल से चमक उठेगी किस्मत! दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ेगी तरक्की, खुलेंगे उन्नति और खुशहाली के नए रास्ते, चूकना मत कल अहोई अष्टमी पर भगवान सूर्य को जल चढ़ाने से उन्नति का रास्ता खुलेगा⤵️ 🌷 घातक रोगों से मुक्ति पाने का उपाय 🌷 👉🏻 01 नवम्बर 2026 रविवार को (सूर्योदय से रात्रि 7:06 तक) रविवारी सप्तमी है। 🙏🏻 रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें । सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ्य दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ ये मंत्र बोलें :- 🌷 "जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।" 💥 नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी । 🚩 🌷 मंत्र जप एवं शुभ संकल्प हेतु विशेष तिथि 🙏🏻 सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं। 🌷 *इनमें किया गया जप-ध्यान, स्नान , दान व श्राद्ध अक्षय होता है। 🚩 🌷 कैसे बदले दुर्भाग्य को सौभाग्य में 🌷 ➡️*01 नवम्बर 2026 रविवार को प्रातः 10:36 से 02 नवम्बर प्रात: 9:04 तक रविपुष्यामृत योग है।* 🌳 बरगद के पत्ते पर गुरुपुष्य या रविपुष्य योग में हल्दी से स्वस्तिक बनाकर घर में रखें | 🚩 🌷 रविपुष्यामृत योग 🌷 🙏🏻 ‘शिव पुराण’ में पुष्य नक्षत्र को भगवान शिव की विभूति बताया गया है | पुष्य नक्षत्र के प्रभाव से अनिष्ट-से-अनिष्टकर दोष भी समाप्त और निष्फल-से हो जाते हैं, वे हमारे लिए पुष्य नक्षत्र के पूरक बनकर अनुकूल फलदायी हो जाते हैं | ‘सर्वसिद्धिकर: पुष्य: |’ इस शास्त्रवचन के अनुसार पुष्य नक्षत्र सर्वसिद्धिकर है | पुष्य नक्षत्र में किये गए श्राद्ध से पितरों को अक्षय तृप्ति होती है तथा कर्ता को धन, पुत्रादि की प्राप्ति होती है | 🙏🏻 *इस योग में किया गया जप, ध्यान, दान, पुण्य महाफलदायी होता है परंतु पुष्य में विवाह व उससे संबधित सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं !!!!*_ कल अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर दिन रविवार को*!!!![[ चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी? सही तारीख, पूजा मुहूर्त और महत्व_]] ((ज्योतिष आचार्य डॉ उमाशंकर मिश्रा- 9415 087711- 9235722996)) **अहोई अष्टमी का व्रत संतानों की कुशलता और खुशहाल जीवन की कामना से रखा जाता है। हर साल यह व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। जानिए इस साल यह व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। **अहोई अष्टमी का व्रत माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना से रखा जाता है। यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और तारों को अर्घ्य देकर इसका समापन किया जाता है। वहीं कुछ महिलाएं इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देकर करती हैं। पंचांग अनुसार इस साल अहोई अष्टमी की तिथि का प्रारंभ कल 1 नवंबर 2026 की रात्रि 7:06 पर होगा और इसका समापन 2 नवंबर 2026 दिन सोमवार को सायं 4:54 पर होगा। जानिए अहोई अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा और पूजा का मुहूर्त क्या रहेगा। **अहोई अष्टमी 2026 तारीख और पूजा मुहूर्त 🪷अहोई अष्टमी कल 1 नवंबर 2026, रविवार 🪷पूजा मुहूर्त सायं 05: 32 से रात्रि 9:00 बजे तक 🪷तारों को देखने के लिये सांझ का समय सायं 6:00 बजे से रात्रि 11:18 तक 🪷अष्टमी तिथि प्रारम्भ 01 नवम्बर 2026 को रात्रि 7:06 बजे 🪷अष्टमी तिथि समाप्त 02 नवम्बर 2026 को सायं 4:54 पर अहोई अष्टमी में चंद्रमा प्रधान होता है चंद्रोदय व्यापिनी अष्टमी कहते हैं अष्टमी के मुख्य पूजा रात्रि समय ही होती है **अहोई अष्टमी व्रत का महत्व अहोई अष्टमी के दिन मातायें अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं। इस व्रत का पारण मुख्य रूप से संध्या समय के बाद अर्थात रात्रि में तारों को देखने के बाद किया जाता है। यह व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली से आठ दिन पहले पड़ता है। इस व्रत को अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है। **अहोई अष्टमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए? 🪷अहोई अष्टमी पर व्रती महिलाओं को धारदार चीजों जैसे चाकू, कैंची आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए। 🪷इस दिन माताओं को मिट्टी से संबंधित कोई कार्य नहीं करना चाहिए। 🪷इस दिन संतान को किसी तरह के अपशब्द न बोलें। व्रती महिलाओं को इस दिन सोना नहीं चाहिए। 🪷अहोई अष्टमी के दिन तारों को अर्घ्य देते समय तांबे के कलश का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 🪷अहोई अष्टमी की पूजा के बाद सात्विक भोजन करना चाहिए। 🪷इस दिन काले वस्त्र धारण न करें। ***अहोई अष्टमी व्रत के फायदे 🪷इस व्रत को रखने से संतानों को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। 🪷मान्यता ये भी है कि इस व्रत को करने से परिवार में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है। 🪷मान्यता है कि जो महिला इस व्रत को विधि विधान से रखती है उसकी संतान पर कोई बड़ा संकट नहीं आता।