!!!*संकट मोचन हनुमान जी महाराज बाबा नीम करोली जी महाराज की जय हो *!!!🚩[[ आज का हिंदू वैदिक पंचांग]] ((ज्योतिष आचार्य डॉ उमाशंकर मिश्र 941 5087711))
🌤️ दिनांक - 06 नवम्बर 2026
🌤️ दिन - शुक्रवार
🌤️ *विक्रम संवत 2083
🌤️ शक संवत -1948
🌤️ अयन - दक्षिणायन
🌤️ ऋतु - हेमंत ॠतु
🌤️ *मास - कार्तिक
🌤️ पक्ष - कृष्ण
🌤️ तिथि - द्वादशी सुबह 11:06 तक तत्पश्चात त्रयोदशी
🌤️ नक्षत्र - हस्त कल प्रातः 05:43 तक तत्पश्चात चित्रा
🌤️ योग - विष्कंभ कल प्रातः 5:57 तक तत्पश्चात प्रीति
🌤️*राहुकाल - सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 तक*
🌤️ सूर्योदय - 06: 31
🌤️ सूर्यास्त - 0 5:29
👉 दिशाशूल - पश्चिम दिशा मे
🚩व्रत पर्व विवरण - प्रदोष व्रत,धनतेरस,यम दीपदान,भगवान धन्वंतरि जयंती
*विशेष- द्वादशी तत्पश्चात त्रयोदशी धनतेरस
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🌷 नरक चतुर्दशी 🌷
➡️ कल 07 नवम्बर 2026 शनिवार को नरक चतुर्दशी, (रात्रि में मंत्रजप से मंत्रसिद्धि), 08 नवम्बर, रविवार को नरक चतुर्दशी (तैलाभ्यंग स्नान) ।
🙏🏻 नरक चतुर्दशी के दिन चतुर्मुखी दीप का दान करने से नरक भय से मुक्ति मिलती है । एक चार मुख ( चार लौ ) वाला दीप जलाकर इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिये –
🌷 ” दत्तो दीपश्वचतुर्देश्यां नरकप्रीतये मया ।
चतुर्वर्तिसमायुक्तः सर्वपापापनुत्तये ॥“
👉🏻 ( नरक चतुर्दशी के दिन नरक के अभिमानी देवता की प्रसन्नता के लिये तथा समस्त पापों के विनाश के लिये मै चार बत्तियों वाला चौमुखा दीप अर्पित करता हूँ।)
🙏🏻 यद्यपि कार्तिक मास में तेल नहीं लगाना चाहिए, फिर भी नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश (तैलाभ्यंग) करके स्नान करने का विधान है। 'सन्नतकुमार संहिता' एवं धर्मसिन्धु ग्रन्थ के अनुसार इससे नारकीय यातनाओं से रक्षा होती है। जो इस दिन सूर्योदय के बाद स्नान करता है उसके शुभकर्मों का नाश हो जाता है।
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दिवाली में करने योग्य 🌷
➡️ * दीपावली के दिन श्री राम अयोध्या आए थे, तो हमारे जीवन में भी श्री राम (ज्ञान), सीताजी (भक्ति) और लक्ष्मणजी (वैराग्य) आए |*
➡️ २. दीपावली के दिन रात भर घी का दिया जले सूर्योदय तक, तो बड़ा शुभ माना जाता है |
➡️ ३. दीपावली के दिन चांदी की कटोरी में अगर कपूर को जलायें, तो परिवार में तीनों तापों से रक्षा होती |
➡️ ४. हर अमावस्या को (और दिवाली को भी) पीपल के पेड़ के नीचे दिया जलाने से पितृ और देवता प्रसन्न होते हैं, और अच्छी आत्माएं घर में जन्म लेती हैं.
➡️ ५. नूतन वर्ष के दिन (दीपावली के अगले दिन ), गाय के खुर की मिट्टी से, अथवा तुलसीजी की मिट्टी से तिलक करें, सुख-शान्ति में बरकत होगी |
➡️ ६. दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष के नीचे घी का दिया जलायें, तो बहुत शुभ माना जाता है |
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🌷 काली चौदसः नारकीय यातनाओं से रक्षा 🌷
▪️ नरक चतुर्दशी (काली चौदस) के दिन यानी की 08 नवम्बर, रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल-मालिश (तैलाभ्यंग) करके स्नान करने का विधान है। 'सनत्कुमार संहिता' एवं 'धर्मसिंधु' ग्रंथ के अनुसार इससे नारकीय यातनाओं से रक्षा होती है।
▪️ काली चौदस और दीपावली की रात जप-तप के लिए बहुत उत्तम मुहूर्त माना गया है। नरक चतुर्दशी की रात्रि में मंत्रजप करने से मंत्र सिद्ध होता है।
▪️ इस रात्रि में सरसों के तेल अथवा घी के दिये से काजल बनाना चाहिए। इस काजल को आँखों में आँजने से किसी की बुरी नजर नहीं लगती तथा आँखों का तेज बढ़ता है।
!!!!* आज से दीवाली के 5 दिन - दीये जलाने का सही विधान* 🪔 एकदम सही क्रम में**!!!!
((ज्योतिषाचार्य डॉ उमाशंकर मिश्रा- 9415087711
(1)---. आज धनतेरस - 13 दीये
त्रयोदशी = 13
- 12 दीये घर में हर कोने में
- 1 बड़ा चौमुखी यम दीप = दक्षिण दिशा में, घर से बाहर - परिवार के स्वास्थ्य और अकाल मृत्यु से बचाव के लिए। सरसों तेल का।
(2)---. छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी - 14 दीये
चतुर्दशी = 14
- मुख्य द्वार पर 2
- पूजा स्थल पर 1
- रसोई, बाथरूम, छत, स्टोर, अलमारी के पास - बाकी 11
- मकसद - नकारात्मकता, नरक की बाधा खत्म।
(3)---. बड़ी दिवाली - 11 / 21 / 51 / 101 / 108 दीये
- सबसे पहला दीया - लक्ष्मी-गणेश के सामने घी का बड़ा चौमुखी दीया
- बाकी - सरसों तेल या घी
- तेल = शनि को शांत (नजर, कर्ज), घी = लक्ष्मी को बुलाना
- घर के हर अंधेरे कोने में रोशनी जरूरी।
(4)---. गोवर्धन पूजा - 5 / 7 / 11 दीये*
- 1 दीया - तुलसी के पास पक्का
- 1 दीया - गौशाला / गोवर्धन चित्र के पास
- बाकी - आंगन और रसोई में
- अन्न और प्रकृति को धन्यवाद।
(5)---. भाई दूज - 5 / 7 दीये
- 1 मुख्य दीया - देहलीज / प्रवेश द्वार पर - यमराज और चित्रगुप्त के लिए
- भाई की लंबी उम्र के लिए तिलक के समय भी दीया जलाएं
- तेल का दीया बाहर, घी का अंदर।
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*3 नियम जो सब दिन लागू:
1. दिशा - लक्ष्मी के लिए उत्तर-पूर्व, यम के लिए दक्षिण
2. बत्ती - 2 बत्ती वाला दीया = पति-पत्नी में प्रेम, 1 बत्ती = मनोकामना
3. दीया बुझाना नहीं - खुद बुझने दो, फूंक मारना अशुभ*****!!
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